वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष तब माना जाता है जब जन्म कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं। जब इस प्रकार की ग्रह स्थिति बनती है, तब ज्योतिषियों के अनुसार इसका प्रभाव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे करियर, विवाह, वित्तीय स्थिति, स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर पड़ सकता है। कालसर्प दोष के प्रभाव की तीव्रता प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है, क्योंकि यह कुंडली में मौजूद अन्य ग्रह योगों पर भी निर्भर करती है।